कुत्तों पर आज भी कायम है दौपदी का श्राप!


मैथुन एक निजी क्रिया है जो जानवर भी छुपकर करते हैं। लेकिन कुत्ता एक ऐसा प्राणी है तो सबके सामने मैथुन करता है। क्या आप इसका कारण जानते हैं? नहीं? तो चलिए आज हम आपको इसका रहस्य बताते हैं, जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। और इस रहस्य का द्रौपदी ने गहरा नाता है। जी हां! आपने सही पढ़ा। दरअसल इसके पीछे एक कहानी है।

पांचाल राज्य की राजकुमारी पांचाली जिसे हम द्रौपदी के नाम से भी जानते हैं, उन्होंने विवाह के बाद कई मुश्किलों का सामना किया है। महाभारत काल में उनकी कहानी अपने आप में एक काव्य है। उस दौर में क्रोधवश तपस्वी और सिद्ध आत्मा श्राप दे दिया करते थे। और इनमें से कुछ का असर चिरकाल तक माना जाता है। उस काल के कई श्राप आज भी देखने को मिलते हैं। इन्हीं में से एक श्राप द्रौपदी का माना जाता है जो उसने क्रोधवश कुत्तों को दिया था।


स्रोत

पौराणिक कथा के अनुसार पांडवों से शादी के बाद द्रौपदी ने कई शर्तें रखीं थीं जिनका पांडवों को कठोरता के साथ पालन करना पड़ता था। उसमें से एक ये था कि द्रौपदी के कक्ष में एक समय पर केवल एक ही पांडव जाएगा। और जो भी इस नियम को तोड़ेगा उसे तुरंत एक वर्ष के लिए वनवास की सजा दी जाएगी। सभी पांडव इस नियम का पालन करते थे और कोई गलती से अंदर न चला जाए इसलिए जो भी पांडव कक्ष में प्रवेश करता था वो अपनी पादुका कक्ष के बाहर रख देता था।

एक बार जब युधिष्ठिर कक्ष के अंदर थे उस समय एक कुत्ता उनकी पादुका चुराकर ले गया। और कक्ष के बाहर कोई पादुका न होने के कारण अर्जुन कक्ष के अंदर चले गए और द्रौपदी को युधिष्ठिर के साथ देख लिया। अर्जुन को तुरंत नियम अनुसार एक वर्ष का वनवास मिला। द्रौपदी जो इस बात से बेहद शर्मिंदा थी उसने क्रोश में आकर कुत्ते को श्राप दिया कि वो सारी शर्म भूल जाएगा और उसे पूरी दुनिया मैथुन करते हुए देखेगी
और इसी श्राप का असर हमें आज भी देखने को मिलता है।


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