क्या है कोहिनूर के श्राप का काला सच?


दुनिया का सबसे कीमती हीरा है कोहिनूर। ये हीरा भारत के एक खदान में पाया गया था जिसके बाद देश-विदेश के कई शासकों ने इसे हासिल करने के लिए जान की बाजी तक लगा दी। सन् 1605 में एक फ्रांसीसी जोहरी जब भारत आया तो उसने कोहिनूर को दुनिया का सबसे बड़ा और अमूल्य हीरा करार दिया। अंग्रेजी हुकूमत के समय इसे अंग्रेज अपने साथ ब्रिटेन ले गए और तब से लेकर आज तक भारत की ये अमानत ब्रिटेन की रानी के मुकुट की शान बना हुआ है।

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कोहिनूर का काला इतिहास

कोहिनूर यानी ‘रौशनी का पहाड़’, लेकिन जितना खुबसूरत इसका नाम है, उतना ही खौफनाक इसका इतिहास है। सदियों पुराना ये हीरा जिसके भी पास रहा उसे ताज तो मिला लेकिन इसके बाद तबाही और मौत भी मिली। इतिहास के पन्नों में इसे हासिल करने वाला कोई भी ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह सका। इसीलिए इसे श्रापित माना जाता है।
कहा जाता है कि इस हीरे के साथ एक श्राप जुड़ा हुआ है जिसके अनुसार, ‘यह हीरा अपने मालिक को दुनिया का शासक बना देगा लेकिन उसके साथ दुर्भाग्य भी जुड़ जाएगा जो बर्बादी और मौत लेकर आएगा, सिर्फ ईश्वर और औरत ही इसे धारण कर श्राप के प्रभाव से मुक्त रह सकते हैं।

मौत लेकर आता है कोहिनूर

कोहिनूर आज से करीब हज़ार साल पहले वर्तमान आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के एक खदान में मिला था। बाबरनामा वो ऐतिहासिक दस्तावेज है जिसमें सबसे पहले इसका उल्लेख मिलता है। इसके अनुसार सन् 1294 में कोहिनूर ग्वालियर के एक अनाम राजा के पास था। हालांकि उस वक़्त इसका नाम कोहिनूर नहीं था। इसे पहचान सन् 1306 के बाद मिली। सन् 1200 से 1300 ई के बीच यह हीरा गुलाम साम्राज्य, खिलजी एवं लोदी साम्राज्य के पास रहा और ये सभी श्राप के कारण जल्द ही तबाह हो गए। सन् 1326 में जब ये हीरा काकतीय वंश के पास गया तो उसने 300 साल पुराने साम्राज्य (सन् 1083 से शासन) को निस्तोनाबूत कर दिया। इस वंश के पतन के बाद ये हीरा सन् 1325 से 1351 तक मोहम्मद बिन तुगलक के पास था। 16वीं शताब्दी के मध्य इसे कई सुल्तानों ने अपने कब्ज़े में लिया और सबका हश्र बेहद खौफनाक रहा।

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इसके बाद शाहजहां ने इसे अपने मयूर सिंहासन में लगवाया जिसके बाद उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। और शाहजहां का अंत तो सभी जानते हैं। सन् 1739 में नादिर शाह भारत आया और कोहिनूर को अपने साथ ले गया। उसने ही इस हीरे को कोहिनूर नाम दिया। सन् 1747 में नादिर शाह का क़त्ल हो गया। उसके बाद कोहिनूर उसके उत्तराधिकारियों के पास चला गया लेकिन कोई भी इसके श्राप से बच नहीं पाया।
वहां से ये हीरा पंजाब के राजा रणजीत सिंह के पास आया और उसके थोड़े समय बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। यहां तक कि ये हीरा हासिल करने के बाद दुनिया पर हुकूमत करने वाला ब्रिटिश साम्राज्य कमजोर हो गया और अपने देश में ही सिमट कर रह गया। ब्रिटिश कोहिनूर के श्राप को समझ गए और उन्होनें इस हीरे को किंग जॉर्ज षष्टम की पत्नी क्वीन एलिज़ाबेथ के मुकुट में जड़वा दिया। ये हीरा आज भी क्वीन के मुकुट पर सुशोभित है।
लेकिन अब एक बार फिर इसे भारत लाने की पहल की जा रही है। कुछ इसके पक्षधर हैं तो कुछ इसका विरोध भी कर रहे हैं। आपका क्या मानना है?


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