धोनी के प्रकोप के आगे अंपायर की एक न चली, बदलना पड़ा अपना फैलसा


आईपीएल 2019 के का 27वां मैच कल जयपुर में राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच हो रहा था. चेन्नई ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी करने का न्यौता राजस्थान रॉयल्स को दिया. राजस्थान ने अपने 20 ओवर के कोटे में 7 विकेट पर 151 रनों का स्कोर चेन्नई के सामने खड़ा कर दिया.

फिर आई चेन्नई की पारी, शुरुआत तो चेन्नई की ठीक ठाक थी. हम ठीक ठाक इस लिए बोल रहे है क्योंकि चेन्नई ने पॉवरप्ले में ही अपने 4 विकेट खो दिए, पर हमारा मेंन फोकस तो मैच के आखरी में है. जिसकी वजह से कैप्टन कूल और चेन्नई के कप्तान को गुस्सा आ गया और अपने मैच की आधी फीस गवां बैठे.

मैच का 18वां ओवर चालू हुआ और चेन्नई को जीत के लिए 18 रनों की जरुरत थी. खैर चेन्नई के फैन्स को लगा धोनी है तो टारगेट बड़े आसानी से अचीव हो गाएगा. पर इस आस पर पानी ओवर की तीसरी बॉल पर फिर गया जब धोनी तीसरी गेंद पर धोनी बोल्ड हो गए.

अब ओवर की आखरी तीन गेंदों पर चेन्नै को जीतने के लिए 8 रन चाहिए थे और चेन्नई के मिशेल सैंटनर स्ट्राइक पर थे स्ट्रोक्स ने एक फुल टॉस फेंकी. अंपायर उल्हास गांधे ने उसे नो-बॉल करार दिया लेकिन लेग पर खड़े अंपायर ब्रूस ऑक्सनफर्ड ने इस फैसले को पलट दिया.

इस पर पिच पर अंपायर और चेन्नई के रविंद्र जडेजा के बीच बहस शुरू हो गयी. मामले की गंभीरत को देख कप्तान धोनी भी पिच के बहार से ही चिल्लाने लगे. और फिर पिच पर भी चले आए. आखिर कार अंपायर को अपना फैसला बदलना पड़ा और आखिरी गंदे पर मिशेल सैंटनर ने छक्का मार कर चेन्नई को जीत दिला दी.

अंपायर के साथ बद्सलिकी करने के लिए धोनी को आईपीएल के कोड ऑफ कंडक्ट 2.20 के तहत लेवल 2 का दोषी पाया गया है. जिसे उन्होंने मान भी कर लिया है. बता दें कि आर्टिकल 2.20 के तहत, ‘वह व्यवहार जो खेल की भावना के विरुद्ध जाता हो’ आता है.

इस जीत के साथ ही चेन्नई पॉइंट्स टेबल में सबसे ऊपर आ चुकी है.चेन्नई ने सिर्फ मुंबई के खिलाफा ही मैच हरा है.

इस सब के बीच देखिये लोगों ने इस मामले में अपनी क्या राय दी.

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