NamoTv पर चुनाव आयोग के सवालों का मंत्रालय ने जो जवाब दिया है,उसने सोचने पर मजबूर कर दिया है


अभी दो चार दिन पहले से आप सभी के टीवी पर एक नया चैनल जुड़ गया होगा है. जो कि आप ने अपने चैनल सिलेक्शन में नहीं चूज किया था. और ये चैनल है मोदी सरकार का नमो टीवी जो इस 31 मार्च को शुरू हुआ था. और शुरू होते ही विवादों में घिर गया है.

विवाद की शुरआत की कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की चुनाव आयोग से शिकायत से, दोनों पार्टी ने शिकयत क्या की ये भी जन लीजिये दोनों पार्टियों ने इस चैनल को बंद कराने की मांग की है. उनका कहना है कि सभी पार्टियों को प्रचार का समान अवसर मिलना चाहिए.

इसके बाद चुनाव आयोग ने सूचना और प्रसारण मंत्रालय से जवाब माँगा था जिसका जवाब अब मंत्रालय ने दिया है. मंत्रालय के अनुसार यह डीटीएच सेवा प्रदाताओं द्वारा शुरू किया गया एक विज्ञापन प्लेटफॉर्म है जिसके लिए सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं. एक सूत्र के मुताबिक मंत्रालय ने यह भी कहा कि नमो टीवी नियमित चैनल नहीं है और यह स्वीकृत चैनलों की आधिकारिक सूची में नहीं आता.

सूत्र के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने चुनाव आयोग से कहा कि मौजूदा नियमों के अनुसार इस तरह के विज्ञापन प्लेटफॉर्म चलाने के लिए उससे किसी मंजूरी की जरूरत नहीं है.

बता दें कि आचार संहिता लागू होने के बाद नमो टीवी की लॉन्चिंग पर चुनाव आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी थी.
मीडिया रिपाेर्ट्स के अनुसार मंत्रालय ने आयोग से कहा कि नमो टीवी लाइसेंस्ड चैनल नहीं, बल्कि डीटीएच विज्ञापन प्लेटफॉर्म है. इसके विज्ञापनों का खर्च भाजपा उठा रही है.

आप को बता दें कि नमो टीवी पर पीएम मोदी के भाषण और बीजेपी से संबंधित कार्यक्रम दिखाए जा रहे हैं. नमो टीवी पर सरकार प्रायोजित कार्यक्रम भी दिखाए जा रहे हैं. दावा ये भी किया जा रहा है कि नमो टीवी को सरकारी विज्ञापन भी मिल रहे हैं चैनल के शुरू होने की जानकारी पीएम मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट में दी थी.


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