यहां दहेज में मिलता है सांप, इसके बिना नहीं होगी शादी!


भारत में सांपों को ‘देवता’ की संज्ञा दी गई है। भारतीय सांपों को श्रद्धा से पूजते हैं। दुनिया में भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहां सपेरों के बच्चे भी सांपों के साथ खेलते हुए नज़र आते हैं। इसके अलावा कुछ ऐसी भी परंपराएं हैं जहां सांप विशेष भूमिका निभाते हैं। और सांपों की अनुपस्थिति में सदियों से चली आ रही ये परंपराएं अधूरी मानी जाती है। ऐसी ही एक प्रचलित परंपरा छत्तीसगढ़ में है जहां सांपों के बिना शादी नहीं होती है।

स्रोत

छत्तीसगढ़ एक आदिवासी अंचल है जिसने आधुनिकता के साथ-साथ अपने पुराने रीति-रिवाज और परंपराओं को आज भी उतनी ही निष्ठा के साथ संजोकर रखा है। यहां रहने वाले विभिन्न आदिवासी समूहों में से एक है सपेरों का समुदाय। वैसे तो अब यह लोग मजदूरी और अन्य रोज़गार के संसाधनों से अपना पेट पालते हैं लेकिन नाग पंचमी पर यह लोग सपेरों की दुनिया के नियमों का पालन करते हैं। वे सांपों को पकड़ते हैं, उनकी पूजा करते हैं और नाग पंचमी के बाद उन्हें दोबारा आज़ाद कर देते हैं।

इन पर है वरदान, नहीं होता है जहर का असर


स्रोत

समुदाय के लोग सांपों को अपने बच्चों की तरह प्यार करते हैं और पूरा परिवार साथ बैठकर सांपों के साथ खाना खाता है। समुदाय के बच्चे खिलौनों से नहीं बल्कि सांपों के बच्चों के साथ खेलते हैं। समुदाय के लोगों का अटूट विश्वास है कि उन पर गुरु गोरखनाथ जी का आशीर्वाद है जिस कारण सांप उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। विशेषकर सावन माह में इन्हें सांप नहीं काटते हैं और अगर कोई सांप काट ले तो इस समुदाय के लोगों पर जहर का असर नहीं होता है।

सांप के बिना नहीं होती है शादी

वहीं इस समुदाय में एक अनोखी परंपरा है जहां बेटी की शादी में सांपों का जोड़ा दिया जाता है। इसके बिना शादी संपन्न नहीं होती है। इसे ये लोग शुभ मानते हैं।


अपने विचार साझा करें


शेयर करें