दर्शन देकर गायब हो जाता है यह मंदिर, रहस्य जान आप भी हो जाएंगे हैरान


भारत को मंदिरों का देश कहा जाता है। यहां ऐसे कई मंदिर हैं जहां आप चमत्कार होते हुए देख सकते हैं। लोग हज़ारों मील का सफ़र तय कर इन मंदिरों में दर्शन करने आते हैं। लेकिन इन सब मंदिरों में एक मंदिर ऐसा भी है जो दर्शन देने के बाद गायब हो जाता है। जी हां, यह सच है। और ये मंदिर किसी अंधेरे जंगल में नहीं बल्कि भारत के सुप्रसिद्ध राज्य गुजरात में स्थित है।

स्तंभेश्वर तीर्थ

गुजरात के वडोदरा से 85 किलोमीटर दूर जंबूसर तहसील का कावी-कंबोई गांव एक बेहद ख़ास बात के लिए जाना जाता है। इस गांव में एक अनोखा मंदिर है जिसे ‘स्तंभेश्वर तीर्थ’ के नाम से जाना जाता है। अरब सागर के बीच कैम्बे तट के निकट स्थित इस मंदिर की खोज 150 साल पहले हुई है। ये मंदिर दिन में सिर्फ एक बार ही दिखाई देता है और फिर सागर में कहीं छुप जाता है।

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यह है इसके पीछे की कहानी

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ताड़कासुर जो कि एक असुर था, उसने भगवान् शिव को प्रसन्न करने के लिए कड़ी तपस्या की। उसकी तपस्या से खुश होकर भोलेनाथ ने उससे मनचाहा वरदान मांगने को कहा। इस पर ताड़कासुर ने वर मांगा कि उसे केवल 6 दिन का बालक ही मार सकेगा। भोलेनाथ ने उसे आशीर्वाद दे दिया। शिव जी से वरदान मिलते ही ताड़कासुर ने अहंकार में आकर तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया। उसके अत्याचार से पीड़ित देवता भगवान् शिव की शरण में पहुंचे। देवताओं की प्रार्थना पर शिवजी ने आदिशक्ति से मिलकर श्वेत पर्वत के पिंड का निर्माण किया। और इसी पिंड से भगवान् कार्तिकेय का जन्म हुआ।


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कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध कर तीनों लोकों को उसके अत्याचार से मुक्त किया। लेकिन ताड़कासुर की शिवभक्ति को जानकार भगवान् कार्तिकेय बहुत दुखी हुए। उसके बाद भगवान् विष्णु वहां आए और उन्होंने विश्व नंदन स्थल की स्थापना की जिसे भगवान् कार्तिकेय ने स्वयं पूरा किया। इसी स्थान को आज हम सब महासागर संगम या स्तंभेश्वर तीर्थ के नाम से जानते हैं।

ऐसे हो जाता है गायब

समुद्र की ऊंची लहरें दिन में दो बार मंदिर के अंदर तक आ जाती है और शिवलिंग का अभिषेक कर वापस लौट जाती है। इस दौरान ये मंदिर लहरों में डूब जाता है और इसी कारण से इस मंदिर का नाम गायब मंदिर पड़ गया है।


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