यहां मिली थी दुनिया की पहली जलपरी!


जलपरी, ये शब्द सुनते ही हमारे जहन में एक बहुत सुंदर सी स्त्री की छवि आती है जिसका आधा शरीर औरत का और आधा हिस्सा मछली का होता है। लेकिन क्या वाकई जलपरी का अस्तित्व है या ये सिर्फ इंसान की खूबसूरत कल्पना मात्र है? दुनिया के कई हिस्सों में अलग-अलग समय पर जलपरी देखा गया है। लेकिन इसकी पुष्टि कोई नहीं कर पाया। चलिए जानते हैं सबसे पहले जलपरी कहां देखी गई थी?

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दुनिया में पहली बार जलपरी का उल्लेख 1000 ईसा पूर्व असायरिया में मिलता है। प्राचीन कथा के अनुसार सेमिरमिस की माँ और असायरियन की रानी देवी अटार्गेटिस एक चरवाहे से प्रेम करती थी। लेकिन परिस्थिति के कारण उन्हें अपने प्यार को मौत के घात उतारना पड़ा। वे इससे इतनी आहात हुई कि वे पानी में कूद पड़ी और एक मछली का स्वरुप धारण किया। लेकिन पानी भी उनकी खूबसूरती को छुपा न सका और वो जलपरी में बदल गई। ग्रीक कहानियों में अटार्गेटिस को डेरकेटो के नाम से जाना जाता है।

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भारत में जलपरी का उल्लेख महाभारत में मिलता है। अर्जुन की पत्नी उलूपी को जलपरी के तौर पर भी संबोधित किया जाता है जो वास्तव में एक नाग कन्या थी और पानी में रहती थी। वहीं अगर आप भगवान विष्णु के मत्स्यावतार को देखें तो इसमें भी उन्होंने अर्ध मानव एवं अर्ध मछली का रूप धारण किया था और इसीलिए उनके इस अवतार को मत्स्यावतार कहा जाता है। दूसरी तरफ अगर आप रामायण के थाई व कम्बोडियाई संस्करणों को पढ़ेंगे तो वहां आपको एक सोने की जलपरी का जिक्र मिलेगा जिसका नाम सुवर्णमछा था। सुवर्णमछा का उल्लेख रावण की बेटी के तौर पर किया गया है।

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इन पौराणिक कथाओं के अलावा कुछ समय पहले गुजरात में पोरबंदर के पास जलपरी देखे जाने की खबर आई थी। सोशल मीडिया की खबरों के अनुसार माधुपुरा गांव के पास समुद्र तट पर एक जलपरी मृत पाई गई थी। इन तमाम खबरों और कहानियों के बीच वैज्ञानिक आज भी जलपरी के अस्तित्व को नकारते हैं और सिर्फ इंसानी दिमाग की कल्पना मानते हैं।

क्या आपने या आपके किसी जानने वाले ने कभी जलपरी या ऐसी ही किसी प्राणी को देखा है?


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